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DARKEST HOUR फिल्म की कहानी | स्टोरी इन हिंदी | Hindi Story

फिल्म की कहानी | स्टोरी इन हिंदी | Hindi Story


मई 1940 - यूरोप के बाकी हिस्सों को जीतने के इरादे से दस  लाख जर्मन सैनिक बेल्जियम के बॉर्डर पर हैं। ब्रिटेन के संसद ने, वर्तमान प्रधान मंत्री नेविल चेम्बरलेन  पर विश्वास खो दिया है और  उनकी  जगह, एक नए प्रधानमंत्री की तलाश कर रहे हैं।

द्वितीय विश्व युद्ध  मै, ब्रिटेन की  नेतृत्व करने में असमर्थत रह रहे ,चैंबरलेन की स्पष्ट अक्षमता पर संसद के  प्रत्येक संसद  ने कोलाहल मचाके रखा था। वो  चाहते थे  एक ऐसा नेता  जो गठबंधन की सरकार बना सकता हो । डिनर के दौरान सब इकट्ठे होकर , विदेश सचिव लॉर्ड हैलिफ़ैक्स  को  नए प्रधान मंत्री बनाने की बात करते है।लेकिन हैलिफ़ैक्स, उनकी  विचार के लिए उन्हें आभार केहते  हैं, पर प्रधानमंत्री बनने से वो इनकार करदेते है। वो केहते है ,उनका  समय अभी नहीं आया है। चेम्बरलेन तब केहता है कि, केवल एक अन्य व्यक्ति है, जिसे स्वीकार किया जासकता है। और वो थे चिर्चिल।कोई भी उस  विचार से प्रसन्न नहीं होता है। 

विंस्टन चर्चिल  के सचिव के रूप में एलिजाबेथ लेटन , पहले दिन, काम की शुरुआत कर रही हैं। जैसे ही वह अपने कमरे में प्रवेश करती है, चर्चिल एलिजाबेथ को फ्रांसीसी राजदूत केलिए  टेलीग्राम टाइप  करने का आदेश देता है। इसके बाद फ्रांसीसी राजदूत ख़ुद  चर्चिल को फ़ोन करके सूचित करते हैं की  जर्मन सैनिकों ने हॉलैंड और बेल्जियम पर आक्रमण कर दिया है। चर्चिल अब , इस ताज़ा खबर को ध्यान में रख़ते हुवे ,एलिजाबेथ को जनरल हेस्टिंग्स इस्माय के लिए एक नया टेलीग्राम टाइप  करने के लिए केहता है । 

चर्चिल तब एलिजाबेथ के काम पर भड़कजाता  है, जिसमें वह उसपर चिल्लाता है और उसका अपमान करता हैएलिजाबेथ आँसू भरी आँखों से कमरे से बाहर निकालती है। एलिजाबेथ चर्चिल की पत्नी क्लेमेंटाइन  के पास जाती  है, जिसे पता होता है कि क्या हुआ था। वह अपने पति को यह बताने के लिए उनके बेडरूम में जाती है, कि वह असभ्य और दबंग, इंसान बनगया है।  वो चाहती थी, दूसरे लोग भी चिर्चिल को वैसे ही प्यार और सम्मान दे जैसे वो देती थी।  पर चिर्चिल का रवैया, दबंगई बनता जारहा था। 


चर्चिल को किंग जॉर्ज VI ,से एक आधिकारिक टेलीग्राम मिलता है, जो उन्हें बकिंघम पैलेस में मिलने के लिए आमंत्रित करता है। चर्चिल के आगमन से पहले जॉर्ज और चेम्बरलेन मिल रहे हैं। जॉर्ज , चर्चिल को लेकर  उत्साहित नहीं है , लेकिन चेम्बरलेन केहता  है कि, चर्चिल ही अकेला ऐसा संसद है जिसको  प्रधानमंत्री बनाने केलिए  सारा विपक्ष का  पूर्ण समर्थन है । वहां  पहुंचने के बाद, जॉर्ज आधिकारिक तौर पर चिर्चिल को  प्रधानमंत्री का पद प्रदान करता है।

चर्चिल ने संसद के सदस्यों को संबोधित करके प्रधान मंत्री के रूप में अपना कार्यकाल शुरू करता है । अपने भाषण में, वह सांसदों  से कहता है कि उसने पहले अपना गठबंधन बनाना शुरू कर दिया है, और वह हर कीमत पर जीत सुनिश्चित करने के लिए दुश्मन के खिलाफ युद्ध छेड़ने की योजना को आगे रखता है।  किसी भी तरह से, किसी भी मोल पर युद्धा जितने की बात करता है।  उसके पहले की सरकार के , जर्मनी के साथ शांति वार्ता की चर्चाओं को वो सिरे से नकारता है। 

चर्चिल के भाषण के बाद लॉर्ड हैलिफ़ैक्स चैम्बरलेन के साथ बाहर बैठते हैं। हैलिफ़ैक्स नेएक नेता के रूप में चर्चिल की क्षमताओं पर अपना संदेह व्यक्त करते है । चेम्बरलेन हैलिफ़ैक्स को बताता है कि उन्हें  कैंसर है और उन्हें डर है कि, वह अपने देश को शांति से रहते हुवे ,देखने के लिए ज्यादा समय ताक जीवित न रहे। हैलिफ़ैक्सचर्चिल को बाहर निकालने केलिए  एक योजना बनता है।  चिर्चिल की इस नई , युद्धनीति के ख़िलाफ़ॅ ,एक अविश्वास प्रस्ताव लाने की बात करता है ताकि चेम्बरलेन की, शांति वार्ता  नीतियों को फिर से बहाल किया जा सके। चैंबरलेन केहता है कि उन्हें चर्चिल से लिखित मै समझौता करना चाहिए की वो  शांति वार्ता के लिए कभी नहीं मानेंगे। 

चर्चिल को सूचित किया जाता है कि 300,000 ब्रिटिश सैनिक डंकिर्क  के समुद्र तटों पर फंसे हुए हैं। उसे यहा  चिंता सताती है की फंसे हुए सैनिकों  को बचाने के लिए और अधिक सैनिकों को कैसे भेजें । चर्चिल इस खबर को अभी से जनता के बीच रखना नहीं  चाहते हैं और वो  फ्रांस को सुरक्षित रखने के बारे में भी  चिंतित हैं।

चर्चिल को अक्सर संसद के अन्य सदस्यों की आलोचना  सुननी पड़ती है। हैलिफ़ैक्स , किंग जॉर्ज से मिलकर चिर्चिल  को उनके पद से हटाने की माँग करते है ।

चर्चिल रेडियो पर राष्ट्र को संबोधित करता है , लोगों को आश्वस्त करने की कोशिश करता  है  वे अपने दुश्मनों पर विजय प्राप्त करेंगे। हालांकि, जब वह घर लौटता है, तो वह क्लेमेंटाइन को बताता है कि उसने झूठ बोला था और वे मूल रूप से पूर्ण वापसी कर रहे हैं । 

डनकिर्क के मामले पर उसे, ए  बताया जाता है कि  लगभग सभी ब्रिटिश सैनिक फंसे हुए हैं। पास के एक गढ़ में सेना की एक और टुकड़ी फसी होती है जिसके  के बारे में चिर्चिल को सूचित किया जाता है। उसे सुनाने के बाद 300,000 सैनिकों  को बचाने के लिए, उन 4000  सैनिकों  को ,लगभग दस लाख जर्मन सेना की टुकड़ी पर धावा बोलने का आदेश देता है।  ताकि वो लोग जर्मन सेना को डिसट्रैक्ट कर सके और ब्रिटिश सेना अपनी , ३००००० सैनिकों को साई सलामत घर ला सके। सभी सांसद इस योजना का विरोध करते है । सदस्यों को लगता है कि यह एक आत्मघाती मिशन है ,लेकिन चर्चिल अपनी योजना पर कायम रहता है। अब , उन फसे हुवे सैनिकों को निकल ने की योजन को तैयार करने का आदेश देता है।

 चर्चिल, बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रैंकलिन रूजवेल्ट से, मदद के तोर पर  40  या 50 वॉर शिप्स  भेजने की मांग करता है। लेकिन , केहते है की नए कानून उन्हें उसकी अनुमति देते  हैं। वो सहायता करने से मना करदेते हैं।  चर्चिल तब एडमिरल बर्तराम रामसे, से संपर्क करता है और केहता है की  जितनी संभव हो उतनी नौकाओं  को आम मछुवारों से लेलो और उन सैनिकों   को निकालो। इसको ऑपरेशन डायनामो ला  नाम दिया जाता है। 

अन्य सांसदों  के साथ एक बैठक के दौरान, शांति वार्ता का विषय फिर से लाया जाता है। चर्चिल, हालिया युद्ध को संभालने के तरीके पर अपने विरोधी विचारों पर हैलिफ़ैक्स के साथ जमकर बहस करते हैं। हैलिफ़ैक्स चर्चिल को शांति वार्ता के लिए 24 घंटे देता है, या वह इस्तीफा दे देगा।

चर्चिल को सूचित किया जाता है कि बेल्जियम ने आत्मसमर्पण कर दिया है, और फ्रांस भी  आत्मसमर्पण करने के लिए तैयार है। चर्चिल और उनके सहयोगियों कोउनके द्वीपों पर संभवीतः  आक्रमण की तैयारी करने का आग्रह किया जाता है। तब यह कहा जाता है कि इटलीब्रिटेन और जर्मनी के बीच शांति वार्ता में मध्यस्थता करने केलिए  तैयार है। चारों और से घिरे हुवे  चर्चिल के पास अब हिटलर के साथ शांति वार्ता पर विचार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं दिखता है। इसलिए जब तक हिटलर ब्रिटेन को अपनी स्वतंत्रता बनाए रखने की अनुमति देता है तब तक शांति वार्ता को चालु रखने शर्त पर वो मानजाता है। 

एलिजाबेथ चर्चिल के लिए एक और टेलीग्राम टाइप कर रही होती  है, लेकिन वह रुक जाती है क्योंकि वह उसे चिर्चिल की अस्पष्ट बोली  समझ नहीं आ रही थी । चर्चिल ने तब नोटिस करता है  कि एलिजाबेथ के पास एक आदमी की फोटो है, जिसके बारे में वह कहती है कि वह उसका भाई का है। वह चर्चिल से कहती है कि वह डनकर्क पर वापस आ रहा  था  लेकिन , पहुँच नहीं सका।  वो युध मै शहीद होगया। चिर्चिल उसे सांत्वाना देता है। 

हिटलर के साथ शांति वार्ता  की इच्छा पर किंग जॉर्ज चर्चिल से मिलने आते है । जॉर्ज चर्चिल के प्रति अपना समर्थन व्यक्त करते हैं और कहते हैं की , जब प्रधानमंत्री के रूप में उसकी  नियुक्ति हुवी थी , तो कोई भी हिटलर से ज्यादा  नहीं डरा था।   
चर्चिल फिर से रामसे से बात करते हैं और कहा जाता है कि वे 860 जहाजों को डनकर्क  की और भेज दिया जाएगा।  जिससे ऑपरेशन डायनामो की शुरुआत होगी।

चर्चिल वेस्टमिंस्टर की  संसत  को मेट्रो से जाता है।  वो युद्ध के प्रति आम  लोगों की राय जानना चाहता था। वहां वो आम  नागरिकों  से मिलता है। कई लोग उनके बीच चर्चिल को देखकर खौफ जाते हैं। एक यात्री उसके लिए अपना सिगार जलाता है। चर्चिल सभी के साथ घुलना-मिलना जारी रखता है। अपने आप को एक दोस्ताना और सुखद व्यक्ति जैसा  दिखाता है। वो लोगों से युद्ध के प्रति उनका  राय पूछता है और बताता है की उनके पास दो रस्ते हैं , एक जर्मनी के साथ समझौता करके हिटलर की तानाशाही को मानना  या दूसरा , पूरी ताकत के साथ लड़ना।  हर कोई अपनी इच्छा से दुश्मन के  सामने झुकने  के खिलाफ अपना  रुख रख़ते है । 

हर कोई आखरी सांस तक लड़ने की बात करते है। ग्रेट ब्रिटेन अपनी इतिहास मै कभी भी किसी भी , दुश्मन के सामने आत्मसमर्पण  नहीं किया था तो लोगों को ये मानने मै  यकीं नहीं था की , ब्रिटेन जैसा महँ देश भी कभी झखसकता है। चर्चिल लोगों के इस भरी समर्थन से इमोशनल होजाता है। 


अंतत: चर्चिल ने शांति वार्ता के खिलाफ पूरी तरह से निर्णय लेता है । संसद में एक और भाषण में, वह जर्मन सेना द्वारा आक्रमण की संभावना को जताता है, और कहता है, हम  समुद्र तटों पर लड़ेंगे , हम जंगलों मै लड़ेंगे , हम हवा मै लड़ेंगे , हम पानी मै  लड़ेंगे , हम पहाड़ों पर लड़ेंगे , हम शहर मै लड़ेंगे ,अंत तक लड़ेंगे ताकि जीत हर हाल मै हमारा हो । संसद सदस्य चर्चिल के अनुमोदन में अपने रूमाल को लहलहाते  हैं।

अंतिम भाग  में कहा जाता  है कि चर्चिल के मछुवारों की बोट के  द्वारा लगभग सभी 300,000 सैनिकों को डनकर्क से बचाया गया । नेविल चेम्बरलेन की छह महीने बाद मृत्यु हो गई। हैलिफ़ैक्स को युद्ध कैबिनेट से हटा दिया गया और वाशिंगटन भेज दिया गया। पांच साल बाद 5 मई को, ब्रिटेन और उसके सहयोगियों ने जीत की घोषणा की। चर्चिल को उस वर्ष के आम चुनाव में हार का सामना कारण पड़ा। चिरचिल के बारे मै  एक उद्धरण, दिखाया जाता है  "सफलता अंतिम नहीं है। विफलता घातक नहीं है। हिम्मत से आगे बढ़ाना ही हमेशा माईने रखता है"





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