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THE POST फिल्म की कहानी | स्टोरी इन हिंदी | Hindi Story


THE POST EXPLAINED IN HINDI (
हिन्दी मे समझिए )

फिल्म की कहानी शुरू होती है वियतनाम मै , साल है १९६५, वियतनाम युद्ध अपने चरम पर है । डेनियल ऐल्सबर्ग नामक एक आदमी अन्य सैनिकों के साथ युद्ध के एक शिबिर पर है। वो वहां एक निरिक्षण ऑफिसर के तौर पर आया है, जिसका काम है की युद्ध की हालत को समझना और प्रोग्रेस रिपोर्ट तैयार करना। उसको अमेरिकी आर्मी के मुख्यालय पेंटागॉन ने एक एक्सपर्ट के तौर पर नियुक्त किया था। रात मै वो सभी सैनिकों के साथ गश्त पर जाता है तभी अचानक दुश्मन का हमला होता है और सभी सैनिक मारेजातें है।
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वियतनाम से वापस आने वाली फ्लाइट मै वो रक्षणा सचिव रोबर्ट मैकनमारा से बात करता है। वो वाइट हाउस के मुख्य सचिव से भी बात करता है। वो केहता है की ज़मीनी तोर पर हालत बहुत ख़राब है। अमेरिकी सैनिकों को दुश्मनों को पहचानने मै बहुत मुश्किल आरही है। दुश्मन हर तरफ़ है , वो केहता है की ये एक सिविल वॉर है जिसे जितना न मुमकिन है। प्लेन से उतरते ही, मैकनमारा प्रेस और मीडिया से बात करता है और झूठ बोलता है की सब कुछ ठीक है। केहेता है की हम , यानी अमेरिकी आर्मी लगातार बेहतर काम कर रही है।


ऐल्सबर्ग इस झूठ से परेशान होकर, वियतनाम युद्ध के बारे मे पेंटागन मे राखी कुछ खुफिया जानकारियोंवाला फाइल को चुरलेता है। वो अपने दो दोस्तों से मिलता है और तीनों मिलकर उन फाइलों की कॉपी बनातें हैं। जब ऐल्सबर्ग उन फाइल को पड़ता है तो हमें पता चलता है की पिछले चार अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने भी वियतनाम के बारें मे लोगों को गलत जानकारियां दी थी। राष्ट्रपति ट्रूमैन , ऐसेनहॉवर ,कैनेडी और जॉनसन भी इसमें शामिल थे। वे सभी भी प्रेस को एक बात केहते थे और ऑफिस मे दूसरी।

अब फिल्म छे साल आगे बढ़ती है। के ग्रैहम नामक एक महिला प्रकाशक ,वाशिंगटन डि सी 1971 मे , दी वाशिंगटन पोस्ट नामक , एक दैनिक समाचार कंपनी की मुखिया बनती है। वो पहली अमेरिकी महिला थी जो एक बड़े समाचार पत्रिका का मुखिया बानी थी। दी वासिंगटन पोस्ट , उस समाया कोई बड़ा एकबार नहीं था। उसकी प्रसार केवल वाशिंगटन राज्य मे थी। इसी कारण से वो कंपनी घाटे पर थी। श्रीमती ग्रैहम , अपनी कंपनी को स्टॉक मार्किट पर लिस्ट करवाना चाहरही थी ताकि उससे मिली पूंजी से, कई ओर राज्य मे समाचार पत्रिका का प्रसारण हो सके।

 एक दिन श्रीमती ग्रैहम को, वाइट हाउस के मुख्य सचिव का फ़ोन आता है और वो केहेता है की राष्ट्रपति की बेटी की शादी का न्यूज़ कवर करने केलिए उसकी पत्रिका से किसी कोभी न भेजें। बाद मे वो पत्रिका के मुख्य संपादक बेन ब्रैडली से उस विचार पर बात करती है। श्रीमती ग्रैहम , ब्रैडली को समाचार पत्रिका के प्रसार को बढ़ाने केलिए, कई तरह के न्यूज़ टॉपिक्स के ऊपर काम करने केलिए केहती है। वो चाहती थी की समाचार पत्रिका सिर्फ़ , सीरियस किस्मके न्यूज़ को न छापे बल्कि दूसरे कम महत्वपूर्ण तथा मनरंजनात्मक न्यूज़ को भी छापे ताकि इससे पत्रिका की सेल्स अधिक हो , हर वर्ग के लोग इसे पड़ सके और दूसरे राज्य मे प्रसार केलिए भी मदद हो।

श्रीमती ग्रैहम अब कंपनी को स्टॉक मार्किट मे लिस्ट करने केलिए बुलाई गई एक बोर्ड बैठक मे शामिल होती है। उस बोर्ड बैठक मे सिर्फ़ वो अकेली ही एक महिला थी ओर बॉस भी। उस बैठक मे, एक मेंबर आर्थर पारसंस , श्रीमती ग्रैहम की लीडरशिप  पर आपत्ति उठाता है। उसका केहना था की , कंपनी की चैयरमेन बने रेहेने केलिए श्रीमती ग्रैहम के पास कोई अनुभव नहीं है। उनके पास कंपनी की मालिकाना हक़ , उनके पति के गुज़रजाने की वज़ह से आया था। उससे पहले वो सिर्फ एक गृहिणी थी , बाकी पुरुष ओर ज़ादातर इन्वेस्टर्स   एक महिला के साथ काम करने मे संकोच कर सकते है।

 श्रीमती ग्रैहम उनसबको यकीन दिलाती है की उनका डिसिशन  कंपनी के हीत मैं ही होगा। बाद मे वो अपने एडवाइज़र  और कंपनी के चेयरमैन  , firtz babe से पूछती है की लिस्टिंग डाक्यूमेंट्स  मैं ऐसा क्लॉज़ क्यों है की आईपीओ के साथ दिन के भीतर यदि कोई कटस्ट्रोफिक इवेंट हुवी तो बैंकर्स  अपना पैसा वापस ले सकतें है ? एडवाइज़र  केहेता है की वो सिर्फ एक फॉर्मेलिटी है। वो तभी लागू होता है जब कंपनी अचानक बंद होजाये या दुनिया भर मे पेपर मिलना बंद होजाये। वो उन्हें उस क्लॉज़ को सीरियस ली ना लेने की एडवाइस देता है। 


अगले दिन मेकनामारा , श्रीमती ग्रैहम से मिलता है ओर उसके बारें मे newyork times paper मैं छप रही विवादास्पद खबर के बारें मे बातचित करता है। वो ओर श्रीमती ग्रैहम कई सालों से अच्छे दोस्त थे। वो छपनेवाली ख़बर को पूरी perspective से देखने को केहेता है. अब , ब्रैडली अपने नए नवेले intern को न्यूयोर्क भेजता है। उसे कहीं से टिप्स मिलीथी की, न्यूयोर्क टाइम्स के मशहूर खोजी पत्रकार नील शिहान, कुछ बड़ी न्यूज़ का खुलासा करने वाला है। 

 Intern  न्यूयोर्क के टाइम्स पत्रकालय मे जाके छानबीन करता है तो उसे पता चलता है की नील शिहान कल के पेपर  मे कुछ इम्पोर्टेन्ट न्यूज़  को छापनेवाले है। ये बात वो ब्रैडली को बताता है।  



अगले दिन न्यूयोर्क टाइम्स पत्रिका , ऐल्सबर्ग से मिलिहुवी , पेन्टगॉन पेपर्स की खबर को विस्तार मे प्रकाशित करते हैं। उसे वो "पेन्टगॉन पेपर्स" की शृंखला के तोर पर प्रकाशित करते है. यानी अभीभी कई सारे विषयों को, वो प्रकाशित करनेवाले थे। इस शृंखला मे , पिछले २० सालों की वियतमान युद्द के बारें में सरकार की झूठ को उजाग़र किया गया था। सारे राष्ट्रपतियों की पोल खोलीगयी थी। इस news से देश भर मे विद्रोह शुरू होजाता है। वियतनाम युद्द मे हर साल लगभग ३०००० सैनिक मारे जारहे थे या injured होरहे थे।  युध्दि के विरोध मे हर दिन प्रदर्शन होरहे थे। सरकारों की झूठ से युवा भड़क गए क्यूंकि युद्ध मे तो वही मर रहे थे। 

जब श्रीमती ग्रैहम , न्यूयोर्क टाइम्स पत्रिका के संपादक, एबे रोसेंथाल और उनकी पत्नी के साथ डिनर पर गयी थी, तब एक सेक्रेटरी आकर एबे रोसेंथाल को बताता है की राष्ट्रपति निक्सन ने उनपर केस धाकिल कर दिया है। सरकार का मानना था की वो सभी पेन्टगॉन पेपर्स देश की ख़ुफ़िया जानकारी है और उसे इस तरह खुले आम प्रकाशित करना देशद्रोह है। इसलिए निक्सन की सरकार , न्यूयोर्क टाइम्स पत्रिका को कोर्ट लेजाती है ताकि प्रकाशन बंद हो सके।

अगले दिन the Washington post पेपर newyork stock exchange पर लिस्ट होती है. प्रति शेयर की कीमत २४. ५ होती है। श्रीमती ग्रैहम सभी investers को धन्यवाद केहेती है। वो अपने ऑफिस मे इस खुशी के मौक़े पर एक छोटी party देती है। party के बाद सभी board members , पत्रकार, टीवी पर खबर पड़ते है की एक फ़ेडरल जेज ने पेंटागन पेपर्स से जुडी सारी ख़बर को देशभर मे कहीं भी छपने पर रोक लगादीया है। ऐसा २०० साल की अमेरिकी इतिहास मे कभी नहीं हुवा था। ये सीधा सीधा प्रेस की आज़ादी पर हमला था। ब्रैडली इससे थोड़ा परेशान होता है।    

अब सभी अखबारों के खोजी पत्रकार , पुलिस , आर्मी , अमेरिकी सरकार के खुफिया विभाग, सारे ऐल्सबर्ग को ढूंढने लगते हैं। निश्चित तोर पर ऐल्सबर्ग underground  होजाता है। वाशिंगटन पोस्ट के काबिल खोजी पत्रकार बेन बग्दीकियन को वो बुलाकर बैठक करता है। उसके पास ७००० से भी ज्यादा pages थी। वो कहता है की उसे उन papers को निकालने मे महीनों लग गए। वो बोलता है की pentagon मे सभी मानते है की इस वॉर से हासिल कुछ नहीं होरहा , ये सिर्फ अमेरिकी प्रतिष्ठा का इशू है। सभी भी president केलिए ये एक पोलिटिकल मुद्दा है, वो हार accept करने को तैयार ही नहीं है। सिर्फ आम युवा बिना वजह मर रहा है। ऐल्सबर्ग उसे 1000 से भी जाय्दा पन्नोंवाल्ला पेन्टगॉन पेपर्स की फाइल देता है। 

 अब बग्दीकियन , ब्रैडली को फ़ोन कर के सभी top पत्रकारों को रेडी रहने केलिए केहेता है। हज़ार पन्नो को पढ़ने केलिए समय लगने वाला था , इसलिए ब्रैडली अपने सबसे भरोसेमंद साथी मेग ग्रीनफ़ील्ड और होवार्ड सिमोंस को बुलाता है। सरकार के द्वारा उनपर भी केस डालने की आकांशा मे , ब्रैडली दो वकीलों को भी नियुक्त करता है। वकील रॉजर क्लार्क और वकील अन्थोनी एस्साए।बग्दीकियन प्लेन मे फर्स्ट क्लास मे बड़ी सी बॉक्स मे उन पेपर्स को लाता है।  


श्रीमती ग्रैहम अपने घर पर अपने बेटी लेली से उन पपेर्स को प्रकाशित करने के खतरे के बारें मे बातचीत करती रेहती है। कंपनी को चलाने मे आरही मुश्किलों के बारें मे भी बात करते हैं। श्रीमती ग्रैहम का दुविधा ए था की वो अपनी कंपनी को स्टॉक मार्किट पर लिस्ट हुवी है, अगर सरकार उनपर केस कर देति है तो इससे निवेशकों पर गलत प्रभाव पड़ सकता है। उनकी आईपीओ cancel होसकती है। पेन्टगॉन पेपर्स कि खबर भी बहुत महत्वपूर्ण थी। लेली अपनी माँ का साथ देते हुवे पेपर्स को प्रकशित करने केलिए केहती है। 

ब्रैडली अपने घर पर सभी पत्रकारों को बुलाकर उन paers को पढ़कर article लिखने केलिए कहता है। उनके पास सिर्फ एक दिन का वक़्त था क्यूंकि newyork times अगले दिन higher court मे अपील करनेवाली थी। ब्रैडली चाहता था की उसके पहले वो publish कर ले ताकि यदि केस  हुवी तो दोनों एक साथ लड़ सकतें है। अब सभी पत्रकार काम पर लगतें है। इस पर लॉयर्स आपत्ति जताते है की आप ऐसे हड़बड़ी मे नहीं छापसकते। यदि केस हुवा तो श्रीमती ग्रैहम और ब्रैडली जेल भी जासकते है। कंपनी की आईपीओ cancel हो सकती है। वो बोर्ड मेंबर्स और चैयरमेन firtz beebe को वहां बुलातें है.

 एडिटर और बोर्ड मेंबर्स के बिच थीकि लड़ाई होती है। बोर्ड मेंबर्स कोई भी रिस्क लेना नहीं चाहते थे। लेकिन ब्रैडली और उसके पत्रकार अड़ गए थे की यदि ये इम्पोर्टेन्ट  न्यूज़ नहीं छपी तो वो सभी रिजाइन करदेंगे। वो भी कंपनी केलिए कटस्ट्रोफिक  इवेंट था। इसका आखरी समाधान के तौर पर सभी लोग श्रीमती ग्रैहम के पास जातें है। आखिरखार वो ही तो न्यूज़ पेपर की मालिक थी। ब्रैडली उन्हें बताता है वाकई मे उनपर सरकार केस होगी यदि वो उन पेपर्स को publish  करेंगे तो। अब उनपर आखरी निर्णय था, वो बहुत सोच विचार कर के प्रकाशन की अनुमति देती है। ये एक BOLD STEP  था।   क्यूंकि वहां पर उनकी सम्पाती दांव पर थी।  वो मालिक थी। यदि कंपनी बंद होगयी तो सभी को दूसरी जॉब मिलेगी लेकिन श्रीमती ग्रैहम का क्या? ये एक बड़ा रिस्क था। 



अगले दिन वाशिंगटन पोस्ट पेन्टगॉन पेपर्स की ख़बर को प्रकाशित करता है। सरकार उनपर केस करती है। मामला अंततः अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचता है। जहाँ सारे न्यायाधीश एकमत से न्यूयोर्क टाइम्स और वाशिंटन पोस्ट पत्रिका के पक्ष पर फैसला सुनाते हैं। उनका केहेना था की सरकारें राष्ट्रीय सुरक्षा के आड़ मे , प्रेस की स्वतंत्रता का हरण नहीं कर सकती। सरकारों की आलोचना करनेवालों को कुचल नहीं सकती। जोभी खबर इन दोनों papers ने छापी थी वो ६ साल पुरानी खबर थी जिसका वॉर पर अब direct इफ़ेक्ट कुछ नहीं था। सरकार सिर्फ अपनी नाकामियाबी को छुपाना चाहती थी। 

पोस्ट ऑफिस मे सभी जशन मानते हैं। श्रीमती ग्रैहम सुप्रीम कोर्ट से एक सेलिब्रिटी की तरह बहार निकलती है। ब्रैडली , श्रीमती ग्रैहम को उनके साथ ड़टकर खड़े रहने केलिए धन्यवाद केहेता है। वो बाकी और पेपर्स को भी दिखलाता है जिन्होंने श्रीमती ग्रैहम को फॉलो करके अपने अपने papers मे भी pentagon papers की खबरों को छापा था। बाद मे वो दोनों अच्छे दोस्त बनजातें है। अगले दॄश्य मे हम देखतें है की राष्ट्रपति निक्सन अपने सहयोगी को order देतें  हैं की , पोस्ट पत्रिका से आनेवाले कोईभी पत्रकार को वाइट हाउस के आस पास घुसने भी मत दो।

कुछ समय बाद निक्सन वाटरगेट स्कैंडल मे फस जातें है और उस कांड का उजाग़र भी पोस्ट पत्रिका ही करती है।
इस हादसे के बाद वाशिंगटन पोस्ट पत्रिका पुरे विश्व मे फेमस होती है। उसका आईपीओ सफल होता है। दुनिया के आमिर आदमी वारेन बुफेट भी उस पत्रिका मे इन्वेस्ट करके लगभग ३०% हिस्से का मालिक बनतें है। 

डार्क सीजन १ की सभी १० एपिसोड्स की पूरी कहानी आप हमारे ब्लॉग पर पड़ सकतें है।

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