Saving Private Ryan फिल्म की कहानी | स्टोरी इन हिंदी | Hindi Story

सेविंग प्राइवेट रयान  फिल्म की कहानी | स्टोरी इन हिंदी | Hindi Story 

 

फिल्म की  शुरुआत होती है एक बुजुर्ग आदमी के साथ होता है। जो अपने परिवार के साथ फ्रांस देश के एक वॉर मेमोरियल  पर आए हैं, जो नोर्मंडी में है। वहां पर द्वितीय विश्वयुद्ध में शहीद हुए अमेरिकी सैनिकों की स्मारक थे। वह बुजुर्ग आदमी एक स्मारक के सामने बैठकर रोने लगते हैं। 

अब फिल्म की कहानी फ्लैशबैक में चलने लगती है। दिन है 6 जून,1944। अमेरिका और इंग्लैंड के संयुक्त सेना की टुकड़ी  फ्रांस देश के नोर्मंडी बीच  पर हमला करने के लिए जा रहे हैं। ये  दिन एक  ऐतिहासिक दिन है इसे डी-डे  कहा जाता है। 

अमेरिकी आर्मी के कप्तान जॉन मिलर और उनकी एक टुकड़ी बीच पर उतरते हैं और जर्मन सैनिकों के साथ लड़ने लगते हैं। ओमाहा बीच बर हिटलर की अटलांटिक वॉल बनाई गई। जहां पर मशीन गन्स  से फायरिंग  हो रहा था. लैंडमाइंस बिछाये  हुए थे। स्टील वायर हर जगह थी । कप्तान मिलर बेंगलुरु टोबिडो की मदद से बीच पर रास्ता बनाने में कामयाब होते हैं। फिल्म की पहली 26 मिनट तक, हमको सिर्फ बीच  पर की गई लड़ाई को डिटेल में दिखाया जाता है। ये पहेली बार था जब युद्ध की बर्बरता को इतने डिटेल में दिखाया गया हो। 

हजारों अमेरिकी और उसके मित्र देश से आए सैनिक बीच पर मर जाते हैं। अंततः वो बीच को काबू करने में कामियाब होते है।  डी - डे के अगले दिन से ही अमेरिकी टैक्स और बाकी सप्लाई आना शुरू होता है।  डी - डे की विजय हिटलर की अंत का शुरुवात होता है। 

वॉशिंगटन वॉर  डिपार्टमेंट में काम कर रही है  एक क्लर्क  को, 3 शहीद जवानों की खबर मिलती है। पहला वाला पेसिफिक में न्यू गिनी में शहीद हुआ था। दूसरा वाला, नोर्मंडी के  ओमाहा बीच पर शहीद हुआ था और तीसरा वाला यूथा  के बीच पर शाहिद हुवा था । यह तीनों सैनिक भाई थे, रयान बंधू।  इन तीनों भाइयों का एक और भाई भी था प्राइवेट जेम्स रयान।  अमेरिकी आर्मी में शामिल होनेवाले आम जवान को प्राइवेट कहतें है , उसके ऊपर के अफसर को सर्जेंट , उसके ऊपर के अफसर को लुटेनेंट और बाद में कप्तान। 

उस वक्त तक अमेरिकी मिलिट्री में एक पॉलिसी थी, कि यदि एक परिवार से एक से ज्यादा भाई मर जाते हैं तो जो बचा हुआ होता है उसको घर जाने दिया जाएगा और उसकी सेवा खत्म की जाएगी। असलियत में पांच भाइयों का एक और टुकड़ा पेसिफिक महासागर के युद्ध में शामिल हुआ था,  जो जापान के समुद्री हमले  के हमले में शहीद हो गए थे।  इसकी वजह से अमेरिकी आर्मी ने अपनी पॉलिसी को बदपरिवार के भाइयों को अलग-अलग।
युद्द के क्षेत्र में भेजने लगे थे ।

अब अमेरिकी जनरल जॉर्ज  मार्शेल को   प्राइवेट जेम्स रयान   की कहानी पता चलला  है ,  वह तुरंत आर्डर देते हैं।  किसी भी हालत में उस नौजवान सैनिक को  सही सलामत घर पहुंचा दिया जाय । अमेरिकी आर्मी के अफसर  जेम्स रयान की माँ को तीनो  बेटों की शहादत की खबर सुनाते हैं।

जेम्स रयान अमेरिकी एयरफोर्स की 101 पैरामिलिट्री टुकड़ी के साथ  नोर्मंडी  में , प्लेन से कूदा था। प्राइवेट रयान एयरफोर्स की पैरामिलिटरी में  काम करता था.  पैरामिलिट्री फोर्स के सैनिकों को  आसमान से पैराशूट्स के साथ बीच से काफी दूर जंप करना था  और पीछे से जर्मन सैनिकों पर हमला करना  था । क्योंकि उस दिन हवाएं  तेज चल रही थी तो सारी 101 बटालियन की फाॅर्स नोर्मंडी  के ऊपर बिखर गई और  जेम्स रयान भी लापता होगया।  

अब कैप्टन मिलर को प्राइवेट रयान को  ढूंढने का काम दिया जाता  है। कैप्टन मिलर अब अपने कंपनी से, सार्जेंट  होर्वाथ , प्राइवेट रिबन , प्राइवेट कापरजो , प्राइवेट मेलिश , प्राइवेट जैकसन, मेडिक वेड  और प्राइवेट उप्पम  कि एक इंटरप्रेटर था  यानी जेर्मन भाषा को ट्रांसलेट करनेवाला था।, इंसबको लेकर  रयान को ढूंढने निकलते हैं।

नोर्मंडी डिस्ट्रिक्ट में लाखों अमेरिकाकी सैनिक बिखर गए थे , इनमे से  एक जवान को ढूंढना डेर में से सुवि ढूंढने जैसा था।  पहले वह नुविल्ले  जाते हैं। जहां पर 101 बटालियन के टुकड़ी के  कुछ जर्मन सैनिकों के साथ लड़ रही थी. वह भी उनकी मदद करते हैं। वहां  पर रह रहे सिविलियन  बजाते है वो सिविलियन अपनी बच्ची को बचाने के लिए देते हैं। इस बच्ची को बचाने के चक्कर में एक स्नाइपर  पर प्राइवेट  कापरजो  को मार डालता है।
प्राइवेट जैकसन, उस स्निप्पेर को  ढूंढ निकाल कर उसे भी मार डालता है।

कैप्टन मिलर वहां पर लड़ रही टुकड़ी  के कैप्टन से जेम्स रयान के बारे में पूछतें  है। तो  कोई दूसरा रयान  मिलता है ,जो दूसरे शहर से था।

वह लोग अपना मिशन चालू रखते हैं। उस रात उसी टुकड़ी के साथ एक चर्च में रुकते है।  अगले दिन एक दूसरी बटालियन की टुकड़ी वहां आती है।  कैप्टेन मिलर अपनी जवानों को इस नए टुकड़ी में रयान के बारें में पूछताछ करने केलिए  कहतें है।  उनको 101  टुकड़ी में शहीद हुवे सैकड़ों जवानों की आइडेंटिफिकेशन टैग मिलता है।  अब वो लोग उसमे भी रयान को ढूंढने लगते है , उनको जानना था की क्या वो पहले ही शहीद तो नहीं होगया है। पर उन में भी उसका टैग नहीं मिलता। 

एक जवान आकर कप्तान मिलर से कहता है की वो 101 टुकड़ी के एक और जवान को जानता है जो शायद जेम्स रयान को जानता हो। अब वो नया जवान बम फटने की वजह से  होगया था , वो कागज़ पर लिख कर कहता है की वो जेम्स रयान को जानता है और वो रामेल्लि में एक ब्रिज की सिक्योरिटी पर तैनात है। 

अब कैप्टेन मिलर उससे रयान की अड्रेस लेकर, अपनी टीम के साथ आगे बादतें है। रास्ते में कुछ  जर्मन सैनिक मशीन गन से  इन पर हमला करने लगते हैं। इस लड़ाई में  प्राइवेट वेड  शहीद होता है। कैप्टन मिलर सबको को मार डालने की आर्डर देते हैं और लड़ाई चलती है। सभी जर्मन सैनिक मारे जातें  हैं सिवाय एक के।
उस  बचे हुए जर्मन सैनिक से उप्पम जर्मन में बात कर के उससे सारी इनफार्मेशन हासिल करता है , उसको वेड की कब्र खोदने को कहता है। क्यूंकि वो जर्मन सैनिक सर्रेंडर हो गया था इसलिए कप्तान मिलर उसकी बन्दुक छीनकर उसे जाने देतें है।  

प्राइवेट रिबन को ये बात अच्छा नहीं लगता और वह कैप्टन मिलर  की लीडरशिप पर सवाल उठाता है। और  मिशन छोड़कर जाने लगता है। उसके मुताबिक़ उस जर्मन सैनिक को मारडालना चाहिए था।  तभी सार्जेंट होवर्थ उसे समझकर , उसे रोक लेते है।  

अब यह सभी आगे बढ़ते रामिल्ला  के पास जातें है। एक जर्मन टैंक और उसके सैनिक इनपर हमला करने लगते है। उस टाइम पर दूसरी ओर से भी हमला होता है और देखने पर पता चलता है कि हमला करने वाला कोई और नहीं बल्कि प्राइवेट जेम्स रयान  और उसके साथी ही थे। अब कैप्टन मिलर  सारे जर्मन टैंक सैनिकों को मार कर।, रयान के  साथ उनके  कमांडिंग ऑफिसर से मिलने जाते हैं।

अब कैप्टन मिलर रयान  से कहते हैं कि उसे  घर जाने का ऑर्डर मिला है, उसके तीनों भाई  युद्ध में शहीद हो गए हैं। जेम्स  को यह खबर सुनकर शौक लगता है। ओर  इस दुख की घटना में भी वह घर ना जाने का फैसला करता है। और अपनी टुकड़ी  के साथ खड़ा रेहे कर लड़ना चाहता है। वह अपने दोस्तों को और साथियों को छोड़कर नहीं जाना चाहता था।

रयान के कमांडिंग ऑफीसर कहते हैं कि वह इस ब्रिज को मुश्किल से काबू में किये हैं। जर्मन की सेकंड एस एस बटालियन इस  ब्रिज पर हमला करने आरही है , इसलिए उन्हें ऑर्डर्स मिले थे की किसीबी हालत में  उस पोजीशन  को न छोड़ा जाए । अब कैप्टेन मिलर  अपने सभी साथियों के साथ वही पर रुक जाते हैं और उस ब्रिज को  बचाने की कोशिश करते हैं। जर्मन एसएस सेकंड बटालियन अपने  टैंक रेजीमेंट के साथ वहां होती है।  अब लड़ाई जोर से चलती है। 

यह लोग अपने सारे गोला बारूद ख़त्म होने तक लड़ने लगते हैं। कुछ  जर्मन सैनिकों को मार डालते हैं। कैप्टेन मिलर के सभी साथी मारे जातें है सिवाय उप्पम के। मरते वक़्त मिलर रयान को केहतें है की अपनी जिंदगी का सही इस्तेमाल करना। उप्पम २भी उस जर्मन सैनिक को मारडालता है जिसकी जान उसने पहले बचाया था।


बाद में अमेरिकी एयरफोर्स और आर्मी  मदद केलिए आकर उन सभी जर्मन्स को भगाते है। फिल्म द्वितीय विश्व युद्द में मरे सारे अमेरिकी सैनिकों की श्रद्धांजलि के साथ ख़त्म होती है।  




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